बुधवार, 16 सितंबर 2026

डॉ. मीनाक्षी स्वामी : व्यक्तित्व एवं कृतित्व

 डॉ. मीनाक्षी स्वामी: व्यक्तित्व एवं कृतित्व

डॉ. मीनाक्षी स्वामी (Dr. Meenakshi Swami) भारत की एक शीर्षस्थ एवं प्रतिष्ठित हिंदी लेखिका, उपन्यासकार, कहानीकार और समाजशास्त्री हैं। वे मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग में प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (समाजशास्त्र) के पद से सेवानिवृत्त हैं। भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों (गृह, सूचना एवं प्रसारण, संसदीय कार्य, पर्यावरण व वन मंत्रालय) तथा साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत डॉ. स्वामी को हिंदी साहित्य, विशेषकर उपन्यास, सामाजिक विमर्श और बाल-साहित्य के क्षेत्र में उनके असाधारण अवदान के लिए जाना जाता है।
प्रारंभिक जीवन, शिक्षा एवं सेवा
डॉ. मीनाक्षी स्वामी का जन्म 27 जुलाई 1959 को हुआ। उन्होंने समाजशास्त्र विधा में उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा "मुस्लिम महिलाओं की बदलती हुई स्थिति" विषय पर अपना शोध प्रबंध प्रस्तुत कर पी-एच.डी. की उपाधि अर्जित की। शिक्षा और समाजशास्त्र के इसी दृष्टिकोण की झलक उनके गंभीर कथा-साहित्य और बाल-मनोविज्ञान पर केंद्रित रचनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
अकादमिक सेवाओं से सेवानिवृत्ति के पश्चात भी वे निरंतर सामाजिक और साहित्यिक विमर्श में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे सौ वर्षों से हिंदी की सेवा व प्रचार में संलग्न देश की प्रतिष्ठित संस्था 'श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर' में मंत्री के रूप में सेवारत हैं। इसके पूर्व वे मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग इंदौर नेटवर्क की सदस्य, संस्कृति विभाग (म.प्र. शासन) की पुस्तक चयन समिति की सदस्य तथा भारत सरकार के कारपोरेट कार्य मंत्रालय की राजभाषा समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं। वर्तमान में वे भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की 'प्रधानमंत्री युवा लेखक योजना' में जूरी और मेंटर के रूप में युवा प्रतिभाओं का मार्गदर्शन कर रही हैं।
प्रतिष्ठित पाठ्यक्रमों में रचना-कर्म
डॉ. स्वामी का रचना-कर्म देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के पाठ्य-विवरण का गौरवशाली हिस्सा है:
  • उपन्यास 'नतोहम्' अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल के स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल है।
  • कहानी 'धरती की डिबिया' गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती है।
  • कहानियाँ 'आउट ऑफ रेंज' और 'कस्तूरी' मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध गुरु नानक खालसा स्वशासी महाविद्यालय तथा कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं।
  • मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के बी.ए. प्रथम वर्ष हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम में द्रुत पाठ के अंतर्गत उनका व्यक्तित्व व कृतित्व शामिल किया गया है।
प्रमुख विधागत कृतियाँ (Bibliography)
1. उपन्यास एवं कहानी संग्रह:
  • भूभल (मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत उपन्यास)
  • नतोहम् (अखिल भारतीय पुरस्कार से सम्मानित एवं विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रम में शामिल उपन्यास)
  • सौ कोस मूमल (उपन्यास)
  • अच्छा हुआ मुझे शकील से प्यार नहीं हुआ, धरती की डिबिया, संकलित कहानियां, मेरी कहानियां (कहानी संग्रह)
2. सामाजिक विमर्श एवं शोध ग्रंथ:
  • कटघरे में पीड़ित, अस्मिता की अग्निपरीक्षा (मराठी में अनूदित), भारत में संवैधानिक समन्वय और व्यावहारिक विघटन, सामाजिक चेतना और विकास के परिप्रेक्ष्य में पुलिस की भूमिका का उद्भव, पुलिस और समाज, मानवाधिकार संरक्षण एवं पुलिस, खंडित होते पुलिस के मानवाधिकार
3. बाल एवं किशोर साहित्य:
  • क्यों...? (नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) द्वारा प्रकाशित; अंग्रेजी, रशियन, ओड़िया, मराठी, तमिल और तेलुगु सहित कई भाषाओं में अनूदित वैश्विक बाल-कृति)।
  • व्यक्तित्व विकास और योग (चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट (CBT) द्वारा प्रकाशित एवं अंग्रेजी में अनूदित)।
  • बाँसुरी के सुर, रंगपंचमी (दोनों कृतियाँ अंग्रेजी व कई भारतीय भाषाओं में अनूदित)।
  • लालाजी ने पकड़े कान (किशोर उपन्यास) तथा बीज का सफर (NCERT द्वारा पुरस्कृत)।
प्रमुख राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक सम्मान
साहित्यिक जगत में विशिष्ट योगदान के लिए डॉ. मीनाक्षी स्वामी को तीन दशकों से निरंतर शीर्ष सम्मानों से नवाजा गया है:
  • राष्ट्रीय पुरस्कार (1993): पर्यावरण व वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिल्म स्क्रिप्ट "इस बार बरसात में" हेतु।
  • पं. गोविन्दवल्लभ पंत पुरस्कार (1993 व 2005): गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा (इस गरिमामयी पुरस्कार को पाने वाली देश की प्रथम महिला)।
  • भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार (1995): सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पुस्तक 'कटघरे में पीड़ित' हेतु।
  • पं. मोतीलाल नेहरू पुरस्कार (1995): संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा।
  • डॉ. भीमराव आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार (1995): विधानसभा सचिवालय, मध्य प्रदेश द्वारा।
  • राज्यपाल सम्मान (1997): महामहिम राज्यपाल, मध्य प्रदेश द्वारा उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान हेतु।
  • बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' प्रादेशिक पुरस्कार (2011): साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश द्वारा उपन्यास 'भूभल' हेतु।
  • अखिल भारतीय राजा वीरसिंह देव पुरस्कार (2012): साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश द्वारा उपन्यास 'नतोहम्' हेतु।
  • सारस्वत सम्मान (2018): साहित्य मंडल नाथद्वारा, राजस्थान द्वारा 'साहित्य कुसुमाकर' की मानद उपाधि।
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नवसाक्षर साहित्य लेखन के लिए उनकी एक दर्जन से अधिक पुस्तकों (निश्चय, सुबह का भूला, साहसी कमला, बहूरानी आदि) पर विभिन्न वर्षों में निरंतर राष्ट्रीय पुरस्कार।

शुक्रवार, 12 अगस्त 2022

Brochure From Lions Ciub Booklet लायन्स क्लब, इंदौर की ओर से ब्रोशर पुस्तिका

 लायन्स क्लब, इंदौर की ओर से ब्रोशर पुस्तिका

Brochure From Lions Ciub Booklet


                                    
                                                                        

                                                                         
                                                     



























                                                        

 लायन्स क्लब, इंदौर की ओर से ब्रोशर

Brochure From Lions Club











                                                            

मंगलवार, 20 मार्च 2018

"भूभल" बलात्कार के कानूनी पहलू पर केन्द्रित हिंदी का पहला उपन्यास

साहित्य अकादमी म.प्र. के बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ पुरस्कार व
        अखिल भारतीय विद्वत परिषद्, वाराणसी के कादम्बरी पुरस्कार से सम्मानित कृति
 



साहित्य अकादमी म.प्र. के बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ पुरस्कार
Sahitya Academy, Culture Dept. Govt. of Madhya Pradesh awarded Balkrishna Sharma ‘Naveen’ Regional Award. (First Hindi novel specifically focused on the legal aspects in favor of rape victim).
Dr. Meenakshi Swami receiving Award by contemporaneous Hon. Minister Culture Shri Lakshmikant Sharma, Director Sahity Academy  professor TRibhuvannath Shukla.


प्रकाशक - सामयिक प्रकाशन, दिल्ली
अखिल भारतीय विद्वत परिषद्, वाराणसी, कादम्बरी पुरस्कार
                 Kadambari Award by Akhil  Bhartiya Vidvat Parishad, Varanasi.

         


साहित्य अकादमी म.प्र. के बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ पुरस्कार व
        अखिल भारतीय विद्वत परिषद्, वाराणसी के कादम्बरी पुरस्कार से सम्मानित कृति
 

"भूभल" बलात्कार के कानूनी पहलू पर केन्द्रित हिंदी का पहला उपन्यास

 

 ‘भूभल’ अर्थात चिंगारियों से युक्त गर्म राख, निरंतर प्रज्जवलित रखने के लिए इसमें कंडा (उपला) दबा दिया जाता है और इसे जब चाहे हवा देकर फिर से लौ बनाया जा सकता है। उपन्यास की नायिका अपने भीतर मौजूद चेतना की अग्नि से विवशताओं, विरोधाभासों के प्रवाह को मोड़कर अपने समय और समाज के बीच उस अग्नि को प्रज्जवलित रखती है, जो धीरे-धीरे लौ बनने को आतुर है।
स्त्री स्वतंत्रता से जुड़ा अहम प्रश्न है दैहिक स्वतंत्रता का। इस संदर्भ में सदा यही बात उठती है कि वह अपने चाहने पर किसी से संबंध बना पाती है या नहीं?
 
मगर इससे भी अधिक महत्व का प्रश्न यह है कि न चाहने पर स्त्री इसे रोक पाती है या नहीं?
किसी महिला के साथ जबरिया यौन संबंध वैश्विक परिदृश्य का दिल दहला देने वाला सच है। इसका सामाजिक पहलू तो कड़वा है ही, कानूनी पहलू भी स्त्री के पक्ष में खड़ा होने के बावजूद उसे शिकार बनाने के इस खेल में अनजाने ही शामिल हो जाता है। उपन्यास इस कड़वे, निर्वसन सत्य को बेबाकी से सामने रखता है।
 
चर्चित लेखिका के पास कथ्य है, तथ्य हैं, मार्मिक पक्ष को देखने की अनुपम दृष्टि है। इस साहसिक, विचारोत्तेजक, मार्मिक उपन्यास से गुजरते हुए पाठक कहीं आक्रोशित होंगे तो कहीं उनकी आत्मा करुण क्रंदन करेगी, फिर भी वे इसे एक बार में पढ़ने को विवश होंगे।
 
उपन्यास की विषय वस्तु बिल्कुल नई है और पृष्ठभूमि कानूनी। कानून जैसे शुष्क विषय काव्यात्मकता और कलात्मकता का आस्वाद कायम रहने से उपन्यास बेजोड़ बन गया है।

 
प्रकाशक - सामयिक प्रकाशन, दिल्ली