मंगलवार, 10 मार्च 2015

मीनाक्षी स्वामी : अस्मिता की अग्निपरीक्षाः मराठी अनुवाद : स्त्री विमर्श

मेरे पास कुछ साल पहले एक पत्र आया था।
एक महिला ने मेरी एक किताब पढकर उसका मराठी अनुवाद करने की अनुमति चाही थी।
साथ में टिकिट लगा पता लिखा लिफाफा भी अनुवाद की अनुमति के लिए रखा था।
ऐसी पाठिका के लिए मेरा मन सम्मान से भर गया। इन्होंने पत्र में लिखा था कि इन्होंने पूरी किताब पढी । इन्हें अच्छी लगी।
मराठी भाषी पाठकों तक इस किताब को पहुंचाना जरूरी है इसीलिए अनुवाद करने की इनकी इच्छा थी।
इन्होंने यह भी लिखा था कि ये व्यवसायिक तौर पर अनुवादक नहीं हैं पर इस किताब का करना चाहती हैं।
मेरी वह किताब नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित हुई थी। सो वह पत्र मैंने वैसा का वैसा नेशनल बुक ट्रस्ट को भेज दिया।
हाल ही में मेरे पास मराठी अनुदित मेरी किताब प्रकाशित होकर आई है।
किताब है अस्मिता की अग्निपरीक्षा और अनुवाद किया है अनिला फडनवीस जी ने।
सच में अनिला जी बधाई की पात्र हैं।




1 टिप्पणी:

  1. बधाई मीनाक्षी जी , फूल खिला है तो सुगंध फैलनी ही है ..हाँ अवसर और ऐसे गुणी पाठक मिलना निश्चित ही प्रसन्नता की बात है .

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