रविवार, 25 अक्तूबर 2015

Meenakshi Swami मीनाक्षी स्वामी - अटलबिहारी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल के पाठ्यक्रम में "नतोहम्" उपन्यास

मेरा उपन्यास "नतोहम्" अटलबिहारी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल के स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल होना निश्चय ही गौरव की बात है।


यह मेरा सौभाग्य है कि प्रख्यात साहित्कार जेनेन्द्र कुमार, नरेन्द्र कोहली और चित्रा मुद्गल जैसे सशक्त हस्ताक्षरों के साथ मेरा उपन्यास भी पाठ्यक्रम में पढाया जा रहा है।

भारतीय संस्कृति के विराट वैभव का अनावरण होता है-सांस्कृतिक नगरी उज्जयिनी में बारह वर्षों में एक बार होने वाले सिंहस्थ जैसे विश्वस्तरीय आयोजन में। यहां ऊर्जा का विस्तार और आध्यात्मिकता का संगम होता है। यह संगम किसने किया? दूर-दूर तक बसे मानव को मानव से जोड़ने का यह यत्न कैसे, कब और किसने किया? वर्षों बीत जाने पर भी श्रध्दा और विश्वास ज्यों का त्यों अडिग कैसे रह जाता है? यह जानने की उत्सुकता है यह उपन्यास।
  
    यह उपन्यास तथाकथित आधुनिकता से आक्रांत भारतीय मानस को यदि अपनी जड़ों की ओर लौटने की दिशा दे सका तो प्रयास सार्थक होगा।
        यही कामना है।