शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

अपनी बात --- मीनाक्षी स्वामी

मीनाक्षी स्वामी
मैंने समाजशास्त्र में एम. ए. किया है और मुस्लिम महिलाओं की बदलती हुई स्थिति पर पीएच. डी. । मध्यप्रदेश शासन के अधीन समाजशास्त्र की प्राध्यापक हूं । लेखन मेरा शौक है । भूभल ब्लॉग के माध्यम से हिन्दी साहित्य और हिन्दी भाषा का प्रचार उद्देश्य है। मेरी लगभग 30 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें चर्चित हैं - अच्छा हुआ मुझे शकील से प्यार नहीं हुआ (कहानी संग्रह), भूभल (उपन्यास ),लालाजी ने पकड़े कान ( किशोर उपन्यास ),अन्य पुस्तकें-भारत में संवैधानिक समन्वय और व्यावहारिक विघटन, राष्ट्रीय एकता और अखंडताः बंद द्वार पर दस्तक,कटघरे में पीड़ित,अस्मिता की अग्निपरीक्षा ,पुलिस और समाज,मानवाधिकार संरक्षण ओर पुलिस,खंडित होते पुलिस के मानवाधिकार ,बीज का सफर ,बहूरानियां,मूमल महेन्द्र की प्रेम कथा इत्यादि।
लगभग हर विधा में हर वर्ग के लिए रचनाकर्म करते हुए मुझे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सम्मान और स्वीकृति के रूप में रचनाओं पर भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दो दर्जन से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार (हर विधा में हर वर्ग के लिए ) मिले । इनमें उल्लेखनीय हैं-
-केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय द्वारा फिल्म स्क्रिप्ट पर राष्ट्रीय पुरस्कार, 1993 ।
-केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पं. गोविन्दवल्लभ पंत पुरस्कार, 1993 और 2005 ।
-सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा भारतेन्दु हरिष्चंद्र पुरस्कार, 1995 ।
-संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा पं. मोतीलाल नेहरू पुरस्कार, 1995 ।
-मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा डॉ. भीमराव आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार, 1995 ।
-मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग द्वारा स्वर्ण जयंती कहानी पुरस्कार, 2007 ।
-आकाषवाणी, नई दिल्ली द्वारा रूपक लेखन का राष्ट्रीय पुरस्कार, 1995 ।
-मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा नवसाक्षर साहित्य लेखन के लिए कई पुस्तकों पर राष्ट्रीय पुरस्कार।
-एन.सी.ई.आर.टी.,नई दिल्ली द्वारा बाल साहित्य व चिल्ड्न्स बुक ट्स्ट द्वारा किशोर साहित्य के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, 1995 ।
-महामहिम राज्यपाल मध्यप्रदेश तथा सहस्त्राब्दि विश्व हिंदी सम्मेलन में उत्कृष्ट लेखकीय योगदान के लिए सम्मानित, 1998 व 2000 ।
कई पुस्तकों का विभिन्न भारतीय भाषाओं व अंग्रेजी में अनुवाद भी हुआ ।
केंद्र सरकार, मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार के विभिन्न पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में मानवाधिकारों पर अनेक व्याख्यान भी हुए है।