मंगलवार, 8 मार्च 2011

लड़कियां --- मीनाक्षी स्वामी

सभी को महिला दिवस की अनंत शुभकामनाएं ।
आने वाले समय में सार्थक बदलाव की कामना के साथ प्रस्तुत है ये कविता


लड़कियां

    लड़कियां, पंजों के बल
    उंची खड़ी होकर
    अमरूद तोड़ लेती हैं ।
    और कुछ अमरूद, पेड़ पर चढ़कर भी ।
    अमरूद तोड़ने के लिए
    मौका आने पर
    दीवार पर भी चढ़ जाती हैं, लड़कियां ।
    और लोहे के नुकीले, सरियों वाले
    फाटक भी उलांघ जाती हैं ।
    जतन से बटोरे अमरूदों की पूंजी को
    दुपट्टे में सहेजकर
    सोचती हैं लड़कियां,
    बड़ी होकर वे ठीक इसी तरह   
     पंजों के बल खड़ी होकर,
    आकाश की अलगनी से
    इंद्रधनुष खींचकर
    अपना दुपट्टा बना लेंगीं ।

20 टिप्‍पणियां:

  1. पर दुपट्टा ही क्‍यों। उन्‍हें इंद्रधनुष को अपना परचम बनाना चाहिए।
    शुभकामनाएं।

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  2. आकाश की अलगनी से
    इंद्रधनुष खींचकर
    अपना दुपट्टा बना लेंगीं ।
    aur banati hain , bahut sundar rachna

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  3. बहुत खूब ... लद्किउओन के मासूम मन और उससे उपजे साहस को सहज ही बाँधा है आपने इन पंक्तियों में .... बहुत लाजवाब ...
    महिला दिवस की शुभकामनाएं ..

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  4. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

    ।। महिला दिवस की शुभकामनाएं ।।

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  5. धरती से आकाश तक अनंत संभावनाएं है। लड़कियाँ अपनी काबिलियत के बल पर अपना परचम लहरा रही हैं।

    सुंदर भाव पूर्ण कविता के लिए आभार

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  6. सुन्दर परिकल्पना, काश यह सच हो जाये।

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  7. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति|
    महिला दिवस की शुभकामनाएं|

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  8. मीनाक्षी मेम !
    प्रणाम !
    आप के ब्लॉग पे पहली बार आना हुआ , अच्छा लगा . ''' अमरुद '' को प्रतीक बना आपने लड़कियों के संधर्भ में अच्छी अभिव्यक्ति कि . ये ही पंजे जीवन ने उतार चढ़ाव और हर परिश्त्तियों में संबल प्रदन करता है , नयी राह दिखता है , साधुवाद .
    सादर

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  9. मीनाक्षी जी आपको ब्लाग पर देख कर मन उत्साह से भर जाता है । आपकी कविता खूबसूरत है । मैं प्रायः कई दिनों तक नेट पर नही आपाती इसलिये टिप्पणियाँ भी विलम्ब से जा पातीं हैं । पर आपको पढना अच्छा लगता है ।

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  10. आज पहली बार आपका ब्लॉग देखा , अच्छा लगा ।

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  11. बहुत सुंदर रचना
    "आकाश की अलगनी से
    इंद्रधनुष खींचकर
    अपना दुपट्टा बना लेंगीं।"
    अद्भुत

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  12. बहुत सुंदर रचना
    "आकाश की अलगनी से
    इंद्रधनुष खींचकर
    अपना दुपट्टा बना लेंगीं।"
    अद्भुत

    उत्तर देंहटाएं
  13. aap bahut accha likhi hai .. is kavita ki antim panktiyo ne dil me apni jagah bana li.. \

    badhayi sweekar kare..

    -------------------

    मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
    आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
    """" इस कविता का लिंक है ::::
    http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html
    विजय

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  14. aaj mauka laga blog dekhane ka. sundar kavitaa ke liye badhai. vaise tumhari kavitaye sundar hi hoti hai. prerak bhi.

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  15. होली का त्यौहार आपके सुखद जीवन और सुखी परिवार में और भी रंग विरंगी खुशयां बिखेरे यही कामना

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  16. सच ही लड़कियां आज आसमां छू रही हैं ...सुन्दर अभिव्यक्ति

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  17. आकाश की अलगनी से
    इंद्रधनुष खींचकर
    अपना दुपट्टा बना लेंगीं
    kya soch hai........wah.

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  18. मीनाक्षी जी आपने तो लडकियों की परिभाषा ही बदल दी लगता है जैसे लड़का और लड़की कैसे नाम का ही फर्क है मुझे आपकी कविता बेहद पसंद आयी धन्यवाद !

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